अहिंसा एवं शाकाहार के प्रवर्तक

जैन संस्कृति के उत्थान में अमूल्य एवं उत्कृष्ट योगदान प्रदान करनेवाले, अहिंसा एवं शाकाहार के प्रवर्तक,सराक क्षेत्र को जैन धारा से पुनः जोड़ने वाले,अनेकों विद्वानों अधिकारियों, डॉक्टरों,सीए, बैंकर्स,शिक्षकों,पत्रकारों एवं गौ रक्षा के सम्मेलनों के लिए पहचाने जाने वाले,महान चिंतन शील,विराट व्यक्तित्व, अद्धभुत मननशील, सन्त पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज aacharya gnyansagar maharaj का यूँ इस जहां से चले जाना सम्पूर्ण भारतवर्ष के जैन ही नही जैनेत्तर समाज के लिए भी अपूरणीय क्षति हैं।

जैन ही नही जैनेत्तर समाज के लिए भी अपूरणीय क्षति हैं

आचार्य ज्ञानसागर महाराज केवल जैन समाज के ही नही अपितु जन जन के सन्त थे। हमेशा उनके विचार जैन धर्म के उत्थान के रहते तो थे ही साथ ही वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए आप सदैव चिंता व्यक्त करते रहते थे । हमेशा वे युवा पीढ़ी विशेष कर किशोर बालक बालिकाओं में जैन धर्म का बीजारोपण करने का कार्य करते रहते थे। अभिभावकों से कहते थे कि युवाओं को साथ लेकर आओ जिससे वो जैन संस्कृति व जैन श्रमण से भली भांति परिचित हो सके क्योकि ये युवा ही भविष्य हैं जिनके कंधों पर जैनत्व का भार टिका है। छात्र छात्राओं से चर्चा कर जिन्हें आत्मीयता प्राप्त होती थी, वास्तविक रूप से आप सच्चे पथ प्रदर्शक,निर्देशक एव नीति निर्धारक थे।


किन शब्दो से आपको श्रद्धांजलि दूं ये समझ से बहुत ही परे दिखाई दे रहा है। आप जैसे महान व्यक्तित्व को जैन समाज हमेशा याद रखेगा और आपके द्वारा प्रदत्त सूत्रों का पालन करता रहेगा । आज इस पवित्र निर्वाण दिवस पर आपने निर्वाण को प्राप्त किया है,धन्य है पुण्यात्मा । सम्पूर्ण देश के हर वर्ग के चैहते थे आचार्यश्री
देश को भारी क्षति हुई।

ॐ शांति शांति शांति

उदयभान जैन बड़जात्या
    राष्ट्रीय महामंत्री ,जैन पत्रकार महासंघ, जयपुर ,(राजस्थान)
 
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